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मंगलवार, 9 अगस्त 2011

दो लफ्ज़ तारीफ़ के क्या लिख दिए उन्होंने


दो लफ्ज़ तारीफ़ के
क्या लिख दिए उन्होंने
मन चंचल हो गया
उनसे मिलने
की जिद करने लगा
दिल ने भी
तस्वीर देख ली उनकी
दिल क्यों पीछे रहने लगा
दिल भी बेकाबू हो गया
इज़हार-ऐ-मोहब्बत
को मचलने लगा
कोई बता दे मुझे
कैसे दोनों को समझाऊँ ?
या फिर तरीका बता दे
पैगाम उन्हें भिजवा सकूँ
उनकी रज़ा भी जान लूं
09-08-2011
1326-48-08-11

4 टिप्‍पणियां:

  1. 'या फिर तरीका बता दे
    पैगाम उन्हें भिजवा सकूँ
    उनकी रज़ा भी जान लूं'

    राजेन्द्र भाई! कालिदास जी तो संदेशवाहक के रूप में मेघ् को दूत बना लिए थे पता नहीं किस युक्ति से? अब आज के युग में मो सोच बदल गयी है साधन गदल गये हैं, अब तो तमाम जरिया मुफ्त का है जैसे मेल, ई-मेल आदि। भला अब इसकी क्या चिन्ता?...बहुत-बहुत बधाई

    उत्तर देंहटाएं
  2. bahut khoob.sach me man humesha prashansa ka bhookha rahta hai.aur vo prashansa kisi apne se mile to khushi kuch aur hi hoti hai.

    उत्तर देंहटाएं