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शुक्रवार, 19 अगस्त 2011

अब यादें ही काफी है जीने के लिए


अब पानी की 
ज़रुरत नहीं 
आंसू ही बहुत हैं 
प्यास बुझाने के लिए
किसी के ग़मों में 
शामिल होने की 
ज़रुरत नहीं है 
खुद के गम ही बहुत हैं
रुलाने के लिए
दिल इतनी बार टूटा
अब हसरतें नहीं बची
दिल लगाने के लिए
अब यादें ही काफी है
जीने के लिए
डा.राजेंद्र तेला,निरंतर 
मोहब्बत,शायरी,यादें,दिल,
19-08-2011
1381-103-08-11
E

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