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रविवार, 14 अगस्त 2011

मनुष्य बन्दर का वंशज है (हास्य कविता )

हँसमुखजी
कन्या महाविद्यालय में
व्याख्याता थे 

छात्राओं को मनुष्य की
उत्पत्ती और विकास के
बारे में
पढ़ा रहे थे
उन्होंने छात्राओं से
सवाल किया
क्या आपको यकीन
होता है ?
मनुष्य बन्दर का
वंशज है
एक
चंचल छात्रा ने
जवाब दिया
खुद को शीशे में
देखती हूँ
तो यकीन नहीं होता
आपको देखती हूँ
तो यकीन होने लगता है
निरंतर
आपकी हरकतें देख कर
यकीन,
विशवास में
बदल जाता है
मनुष्य बन्दर का
वंशज है 
डा.राजेंद्र तेला,निरंतर
14-08-2011
1359-81-08-11

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