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सोमवार, 11 जुलाई 2011

दिल करता


दिल करता है
जहन के दरीचे खोल दूं
उसमें भरा नफरत का
कचरा निकाल दूँ
झाड पोंछ कर साफ़ करूँ
नए ख्यालों से सजाऊँ
प्यार के फूलों से भर दूं
लोगों को गले लगाऊँ
दुआओं से नवाजूं
हँसू और हँसाऊँ
हर दिन दीपावली
ईद मनाऊँ
© डा.राजेंद्र तेला,निरंतर
11-07-2011
1165-49-07-11
(दरीचे =खिड़कियाँ,नवाजूं =भेंट देना,अनुग्रह,सहायता )
नफरत,प्यार,शायरी,

8 टिप्‍पणियां:

  1. कल 30/08/2011 को आपके दिल की बात नयी पुरानी हलचल पर लिंक की जा रही हैं.आपके सुझावों का स्वागत है .
    धन्यवाद!

    उत्तर देंहटाएं
  2. आपके कविता के क्या कहने..........बेहतरीन

    उत्तर देंहटाएं
  3. वाह बेहद उम्दा और प्रशंसनीय रचना।

    उत्तर देंहटाएं
  4. निरंतर लोगों को
    गले से लगाऊँ
    दुआओं से नवाजूं
    हंसू और हंसाऊं
    हर दिन दीपावली
    ईद मनाऊँ |
    बहुत खूब दोस्त जी |

    उत्तर देंहटाएं