ADVERTISEMENT

Bookmark and Share

Register To Recieve Latest Poems On Your Email or Mobile

Enter your email address:

Click Here To Subscribe On Mobile Bookmark and Share

गुरुवार, 28 जुलाई 2011

तुम बेखबर अपनी मासूमियत से


खूबसूरत
चेहरा तुम्हारा
अनछुए गुलाब के
फूल सा महकता
निरंतर दिल को
लुभाता
नज़रों का धोखा नहीं
हकीकत है
कुछ तुम में है
जो किसी और में नहीं
तुम बेखबर
अपनी मासूमियत से
मैं वाकिफ हो गया
कद्रदान बन गया
दिल भी बेबस
मजबूरी में तुम पर
लुट गया
डा.राजेंद्र तेला,निरंतर
28-07-2011
1256-140 -07-11

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें