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रविवार, 17 जुलाई 2011

इक आवाज़ ने मुझे जगाया ,सुकून का फलसफा समझाया


दिल दर्द से
रो रहा था
नाकामयाबी के
तूफ़ान से लड़ रहा था
इक आवाज़ ने जगाया
सुकून का
फलसफा समझाया
परेशान मत हो
"मैं"को छोडो
"मैं"दर्द बढाता है
क्या किसी ने कहा ?
क्या किसी ने करा?
जहन से निकालो
करने वाले करते रहेंगे
आगे बढना तो
इच्छाओं पर काबू रखो
होड़ से बचना सीखो
आसान नहीं सब करना
यह भी जान लो
लोग बेईमानी करें
तुम ईमान से जीते रहो
खून का घूँट पीना भी पड़े
तो ख़ुशी से पीते रहो
कर्म में लगे रहो
कामयाबी और सुकून
लिखवा कर ले लो

© डा.राजेंद्र तेला,निरंतर

कर्म,सुकून,कामयाबी,ईमान,बेईमानी,ज़िंदगी, 
18-07-2011
1203-83-07-11

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