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शुक्रवार, 15 जुलाई 2011

आँखों ने रोना ,दिल ने तडपना छोड़ दिया

आँखों ने रोना
दिल ने तडपना
छोड़ दिया
खूबसूरत चेहरों ने,
शोख अंदाज़ ने
लुभाना छोड़ दिया
अब हमने उम्मीद
करना छोड़ दिया
खुद पर
काबू कर लिया
चुप रहना,
हंस कर बर्दाश्त
करना सीख लिया
मर कर भी 
जीना सीख लिया
बिना किश्ती 
किनारा ढूंढ लिया
डा.राजेंद्र तेला,निरंतर
15-07-2011
1185-68-07-11

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