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शनिवार, 16 जुलाई 2011

जीवन का अंतिम समय आ गया था

सांस लेने में 
कठिनायी हो रही थी
आँखें बार बार
बंद हो रही थी
दृष्टि मंद हो गयी थी 
जुबान काँप रही थी
मुख से अस्पष्ट स्वर
निकल रहे थे
हाथ उठाने का 
प्रयास करता
हाथ हिल कर रह जाता
पास खड़े लोगों को
पहचानने का प्रयत्न करता
विफल हो जाता 
मस्तिष्क पर जोर डालता
क्यों ऐसा हो रहा ?
समझ नहीं पाता 
चेहरा भावहीन
चिंतामुक्त था
शरीर जवाब दे रहा था
उसे पता नहीं था
जीवन का अंतिम समय
आ गया था
अपनों से बिछड़ने का
संसार से जाने का
समय हो गया था
डा,.राजेंद्र तेला,निरंतर
जीवन,मृत्यु 
16-07-2011
1191-73-07-11

4 टिप्‍पणियां:

  1. Anita ने कहा…

    मृत्यु के समय का सटीक वर्णन!
    १६ जुलाई २०११ १:०० अपराह्न

    उत्तर देंहटाएं
  2. Vaanbhatt ने कहा…

    यही सबका हश्र है...सुन्दर चित्रण...
    १६ जुलाई २०११ ६:४८ अपराह्न

    उत्तर देंहटाएं
  3. rubi sinha ने कहा…

    यही सबका हश्र है...सुन्दर चित्रण...
    १६ जुलाई २०११ ७:१० अपराह्न

    उत्तर देंहटाएं
  4. ईश्वर तो सब काम भले के लिए ही करता है, बुरे के लिए तो इंसान ही करता है और यह सुधरने के लिए तैयार नहीं हो रहा है।
    आप ख़ुद देख लीजिए
    शुक्रिया !
    समलैंगिकता और बलात्कार की घटनाएं क्यों अंजाम देते हैं जवान ? Rape

    उत्तर देंहटाएं