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रविवार, 17 जुलाई 2011

हर लफ्ज तेरी यादों में ढला

हर लफ्ज
तेरी यादों में ढला
जहन तेरे
ख्यालों से भरा
हर नज़्म में होता
ज़िक्र तेरा
दिल निरंतर गम में रोता
मोहब्बत की डगर
मैंने ही चुनी थी
हसरतें भी मेरी ही थी
जो भी सिला मिला
खुशी से मंज़ूर मुझे
© डा.राजेंद्र तेला,निरंतर
17-07-2011
1199-79-07-11
 
इश्क़,गम,बेवफाई,मोहब्बत,गम,हसरतें,शायरी 

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