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शुक्रवार, 8 जुलाई 2011

ताली बजाना उनकी मजबूरी है

कवी सम्मलेन में
एक कवी महोदय
निरंतर धुंआ धार
 तरीके से
एक के बाद एक 
कविता
पाठ कर रहे थे ,
श्रोताओं को कुछ समझ
नहीं आ रहा था
फिर भी
आगे की सीटों पर बैठे
दस बीस लोग ,
हर कविता पर ताली
बजा रहे थे
मैंने पड़ोस में बैठे
सज्जन से पूछा
किसी को समझ नहीं
आ रहा
फिर आगे बैठे लोग
ताली क्यों बजा रहे हैं
उसने जवाब दिया ,
जो कविता पाठ कर रहे हैं
वे कवियों के नेता हैं
कवी सम्मलेन वे ही
करवाते हें
आगे बैठे सब कवी हैं
जो इनके कहने पर ही
कवी सम्मेलनों में बुलाये
जाते हैं
निमंत्रण पाने के लिए
अपनी भड़ास निकालने
के लिए 
नेता कवी को खुश करना
ज़रूरी है
इसलिए पसंद नहीं
आने पर भी
ताली बजाना उनकी
मजबूरी है
08-07-2011
1150-34-07-11

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