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शुक्रवार, 1 जुलाई 2011

सपने में आना ज़रूर

मेरी इल्तजा सुनना 
 ज़रूर
सपने में आना ज़रूर
आओ तो रुकना ज़रूर
लौट कर ना जाना
नींद से ना उठाना
वादा मेरा तुमसे
सदियों तक रहूँगा साथ
जब तक रहोगे मेरे पास
ज़मीन पर ना सही
सपनों में मिलूंगा
निरंतर तुम्हें देखूंगा
तुम ना कहोगे जब तक
हर लम्हा तुम को दूंगा
खुद को भूलूंगा
दुआ खुदा से करूंगा
सपने में रहने दे
सपने में जीने दे
सपने में मरने दे
सिर्फ तेरा साथ 
दे दे
01-07-2011
1117-01-07-11

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