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बुधवार, 15 जून 2011

हकीकत नहीं बता पता

धूप वही,बारिश वही
गर्मी वही,पानी वही
हवा में वो खुशबू नहीं
ये ज़मीन नहीं मेरी
ये धरती विदेशी
मुल्क की याद सताती
अपनों की याद आती
रातों की नींद उडाती
मेरे गाँव की मिट्टी सी
सुगंध नहीं होती
शक्लें जानी पहचानी
मगर अपरिचित रहती
कोई जुबां चाचा,
भैया नहीं कहती
देश के नाम पर
आँखें नम होती
निरंतर झूठी मुस्कान
चिपकी रहती
बातें बहुत कर ली
फिर भी हकीकत नहीं
बता पता
मेरा ज़मीर मुझे
कचोट रहा 
इस लिए बता 
रहा हूँ  

पैसे के मोह में

विदेश में रुका 
हुआ हूँ

15-06-2011
1048-75-06-11

3 टिप्‍पणियां:

  1. मुल्क की याद सताती
    अपनों की याद आती
    रातों की नींद उडाती
    मेरे गाँव की मिट्टी सी
    सुगंध नहीं होती...

    Beautiful lines! making me nostalgic.

    .

    उत्तर देंहटाएं
  2. आपकी पोस्ट आज के चर्चा मंच पर प्रस्तुत की गई है
    कृपया पधारें
    चर्चा मंच{16-6-2011}

    उत्तर देंहटाएं