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सोमवार, 13 जून 2011

मिलो ना मिलो,मुझे तो रातों में जागना पडेगा

मिलो ना मिलो
मुझे तो रातों में जागना
पडेगा
मिलोगी तो 
दिल खुश होगा
कब जाने को कहोगी ?
ख्याल निरंतर परेशान
करेगा
जाओगी तो कब फिर
आओगी
जहन में सवाल आता
रहेगा
हर नाज़ नखरा उठाना
पडेगा
आग में झुलसना पडेगा
मिलोगी तो
डर जुदायी का सताएगा
ना मिलोगी तो
याद  में रोना पडेगा
13-06-2011
      1043-70-06-11   

(इब्तिदा-ए-इश्क़=प्रेमारंभ,मोहब्बत की शुरुआत) 

1 टिप्पणी:

  1. फिर मिलो या नहीं ...क्या फरक पड़ता है ...
    बेहतरीन अभिव्यक्ति !

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