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शनिवार, 18 जून 2011

कैसे लोग राज कर रहे ?

आज के हालात से
चिंतित  हूँ
रोज़ हो रहे कत्लों से
व्यथित हूँ
कैसे लोग राज कर रहे ?
अचंभित हूँ
निरंतर खुदा से दुआ
करता हूँ
कातिलों को सदबुद्धी दे
जिन्हें मारना चाहिए
उन्हें छोड़ देते
जिन्हें छोड़ना चाहिए
उन्हें मार देते
जिन्हें जेल में होना
चाहिए
वो राज कर रहे
जिन्हें राज करना
चाहिए
वो बाहर बैठे कर
देश की हालत से
दुखी हो रहे
विधि के विधान पर
विचारों का मंथन
कर रहे
18-06-2011
1068-95-06-11

2 टिप्‍पणियां:

  1. डॉ .राकेश शरद19 जून 2011 को 12:06 am

    घोर यथार्थ ! मज़ा आगया | समस्या ये है कि इसे पढ़ कर कहीं ये बुरा ना मान जाएँ | खैर आपको बहुत -बहुत बधाई !

    डॉ .राकेश शरद

    उत्तर देंहटाएं
  2. चालबाज, ठग, धूर्तराज सब, पकडे बैठे डाली - डाली |
    आज बाज को काज मिला जो करता चिड़ियों की रखवाली |

    दुग्ध-केंद्र मे धामिन ने जब, सब गायों पर छान्द लगाया |
    मगरमच्छ ने अपनी हद में, मत्स्य-केंद्र मंजूर कराया ||

    महाघुटाले - बाजों ने ली, जब तिहाड़ की जिम्मेदारी |
    जल्लादों ने झपटी झट से, मठ-महन्त की कुल मुख्तारी||

    तिलचट्टों ने तेल कुओं पर, अपनी कुत्सित नजर गढ़ाई |
    तो रक्त-कोष की पहरेदारी, नर-पिशाच के जिम्मे आई ||

    उत्तर देंहटाएं