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बुधवार, 15 जून 2011

तूं सामने बैठी हो ,मैं तुझे देखता रहूँ

ये तमन्ना मेरी
तूं  सामने बैठी हो
मैं तुझे देखता रहूँ
तेरी हर अदा को
निहारता रहूँ
ना सवाल करूँ 
ना तेरा हाल पूछूं ?
बस आँखों से लुत्फ़
लेता रहूँ
तेरी मुस्कान दिल में
ज़ज्ब करता रहूँ
निरंतर 
गुलाबी लबों में
किसी फूल का
अक्स देखूं
तेरी  झील सी नीली
आँखों में डूबता रहूँ
तेरे गेसूओं में 
उलझता रहूँ
तेरे गंदुमी रंग से
होली खेलता रहूँ
हसरत है कि
बस तुझे देखता रहूँ
15-06-2011
1050-77-06-11

5 टिप्‍पणियां:

  1. vaah rajendr ji sbhi ke dil ki kahani byan kar di hai jnab ne bahut khub mubark ho .akhtr khan akela kota rajsthan

    उत्तर देंहटाएं
  2. Sanjeev Prajapati ने कहा…

    क्या खूब लिखा है । बहुत अच्छा ।
    १६ जून २०११ ८:३८ अपराह्न

    उत्तर देंहटाएं
  3. sushma 'आहुति'17 जून 2011 को 7:54 pm

    sushma 'आहुति' ने कहा…

    hamari bhi dua hai ki aap yu hi likhte rahe... bhut hi pyari panktiya....
    १६ जून २०११ ९:५३ अपराह्न

    उत्तर देंहटाएं
  4. manu shrivastav ने कहा…

    हसरत है कि
    बस तुझे देखता रहूँ ,देखता रहूँ ,देखता रहूँ .
    १७ जून २०११ ७:०८ अपराह्न

    उत्तर देंहटाएं
  5. Dr. Rakesh Sharad ने कहा…

    वाह ! निरंतर जी वाह !
    क्या आप इसी दुनिया में रहते हैं ........?
    वैसे मुझे चुपचाप से बताइए ,आखिर वो है कौन ....?
    इतना टाइम..... दोनों के पास.....?.....वाओ ..
    वैसे आप कवी हैं शायद .....|
    तभी तो इस महंगाई के दौर में .....ऐसा फाकामस्त चिंतन !
    प्रभुजी ,धन्य हैं आप !
    आपनेतो उसका पूरा एक्सरे कर लिया ?
    उसकी बोली ....उसकी आँखें ....उसका रंग ....
    उसके गेसू ....?

    निरंतर जी ,आप किस jagah
    ये karyakram संपन्न कर रहे हैं ...किसी को भी ना बतलाएं \
    जमाना बड़ा ख़राब है .......|
    मेरी शुभकामनायें आपके साथ हैं

    आपका
    डॉ. राकेश शरद

    १८ जून २०११ ६:२२ अपराह्न

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