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रविवार, 12 जून 2011

जब इंसान ने परमात्मा का मार्ग छोड़ दिया

मैंने अखबार में पढ़ा
दोस्त ने दोस्त का 
क़त्ल किया
पत्नी ने पती को 
मार दिया
माँ ने बेटे को
लावारिस छोड़ दिया
बेटे ने माँ बाप को
घर से निकाल दिया
मन बहुत व्यथित हुआ
अखबार उठा कर 
रख दिया
चेहरे को हाथों में
 छुपा कर सोचने लगा
क्यों इंसान निरंतर
हैवान सा बर्ताव कर रहा ?
तभी मित्र का आना हुआ
व्यथा का कारण पूंछा
मैंने मन का हाल 
बताया
वो कहने लगा
निरंतर जब इंसान ने
परमात्मा का मार्ग 
छोड़ दिया
अपना ज़मीर को 
मार दिया
तो इंसान को क्या 
छोड़ेगा
 12-06-2011
1037-64-06-11

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