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गुरुवार, 16 जून 2011

सूखा फूल गुलाब का भी कुछ कहता है

सूखा फूल  गुलाब का भी कुछ  कहता है
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सूखा फूल
गुलाब का भी कुछ
कहता है
रो रो कर अपनी 
कहानी सुनाता है
कभी खिला हुआ था
खूब महकता था
हर देखने वाले को
लुभाता था
निरंतर इतराता था
उसे पता ना था
वक़्त एक सा नहीं
रहता
हर आने वाले को 
जाना पड़ता है 
भूल गया था
जीवन का सत्य
ऐसा ही होता है 
जो कभी अर्श पर
होता है 
उसे फर्श भी 
चूमना पड़ता है 
डा.राजेंद्र तेला,निरंतर
16-06-2011
1055-82-06-11
जीवन,समय,कल,आज ,कल

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