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मंगलवार, 28 जून 2011

ना गम में ना खुशी में,मलाल कोई

ना गम में
ना खुशी में
मलाल कोई
किसी सवाल का
कोई जवाब नहीं
अब उनका भी
ख्याल नहीं
भुगतना है जो
लिखा किस्मत में
अब और
कोई रास्ता नहीं
 ज़िन्दगी निरंतर अकेले
गुजारने के सिवाय
अब कोई
और चारा नहीं
28-06-2011
1109-136-06-11

1 टिप्पणी:

  1. हमेशा भीड़ में फिर भी अकेलापन मेरी किस्मत
    क्यूँ अपनों से,खुदा से भी, मिली कोई नहीं रहमत
    जहाँ रिश्ते नहीं अक्सर वहीं पर प्रेम मिलता है
    मगर रिश्ते जहाँ होते क्यूँ मिलती है वहीं नफरत
    सादर
    श्यामल सुमन
    09955373288
    http://www.manoramsuman.blogspot.com
    http://meraayeena.blogspot.com/
    http://maithilbhooshan.blogspot.com/

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