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शुक्रवार, 10 जून 2011

बहुत वीरान लगता है जहाँ


बहुत वीरान 
लगता है जहाँ
जहाँ तुम थी है 
अब सन्नाटा वहाँ
महफ़िल सूनी 
साज़ खामोश हैं 
फूल भी खुशबू से
महरूम हैं
 जश्न का माहौल
रहता था जहाँ
अब मातम का 
मंज़र है वहाँ
चेहरा ग़म में डूबा हुआ
आँखों से अश्क बहा रहा
तुमसे जुदा क्या हुआ ?
खुदा से यकीन उठ गया
दिल अब लगता नहीं यहाँ
ज़िंदा रहूँ या मर जाऊं
अब फर्क किसी को 
पड़ता कहाँ ?
बहुत वीरान 
लगता है जहाँ
डा.राजेंद्र तेला,निरंतर 
10-06-2011
1026-53-06-11 
डा.राजेंद्र तेला, निरंतर, 
मोहब्बत,जुदाई,खामोशी,यादें 

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