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रविवार, 12 जून 2011

मजबूरी

उसने नज़र मिलाई
मैंने भी नज़र मिलाई
वो मुस्कराया
मैं भी मुस्कराया
उसने हाथ हिलाया
मैंने भी हाथ हिलाया
वो बडबडाने लगा
मैं भी बडबड़ाने लगा
उसने कदम आगे
बढाया
मैंने भी कदम आगे
बढाया
उसने एक
जन्नाटेदार थप्पड़
गाल पर लगाया
मैं दर्द से बिलबिलाया
हिम्मत कर
दूसरा गाल भी आगे
कर दिया
वो पहलवान था
मुझसे तगड़ा था
मेरी मजबूरी थी
उसे पीट नहीं सकता था
इस लिए पिटने का
फैसला कर लिया
12-06-2011
1039-66-06-11

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