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सोमवार, 20 जून 2011

हंसमुखजी ने विवाह की पचासवीं वर्षगाँठ मनायी

हंसमुखजी ने
विवाह की पचासवीं
वर्षगाँठ मनायी
 लोगों ने उनकी हिम्मत पर 
आश्चर्य से 
दांतों तले ऊंगली दबायी
धीरे से मन की जिज्ञासा
हंस मुखजी को बतायी
कैसे सफलता पायी ?
  कैसे इतने साल निभायी ?
हमें भी बताओ
मन की जिज्ञासा मिटाओ
नयी पीढी को भी
रास्ता दिखाओ
हंसमुखजी हँसे फिर बोले
बहुत आसानी से निभायी
वो हंसी,मैं हंसा
वो रोयी,मैं रोया
उसने धोया,मैं धुला
उसने लगायी,मैंने खायी
उसने कहा,मैंने सुना
वो रूठी,मैंने मनाया
वो आगे आगे,मैं पीछे पीछे
ना क्रोध किया,
ना विरोध किया
जो माँगा वो दिया
हर स्थिती को
सहर्ष स्वीकार किया
निरंतर
उसकी हाँ में हाँ मिलायी
तब जा कर पचासवी
वर्षगाँठ मनायी
अब आदत हो गयी
इस लिए सौंवी  भी
मनायी जायेगी
20-06-2011
1077-104-06-11
आदरणीय श्री मोहन लालजी जैन को
शुभकामनाओं के साथ सप्रेम भेंट
(क्षमा सहित)

1 टिप्पणी:

  1. बहुत मुश्किल है भाई |
    सचमुच कैसे निभाई ||
    25 को ही पड़ गए हैं लाले |
    सचमुच
    हंसमुख जी बड़े हिम्मत वाले |

    वो पडोसी आज तक पोछा लगाता, दूध ग्वाले से दुहा कर रोज लाता

    हर सुबह सब्जी ख़रीदे खुद पकाता, धुलता सारे वस्त्र नियमित, फिर नहाता

    गल्तियों पर कसम खाता गिड़गिडाता, किन्तु बीबी जब डपटती डूब मरिये

    हौज में पानी भला किस हेतु भरिये, व्यर्थ ताने मारना बस बन्द करिए-


    आठ घंटे चाकरी में जा बिताया, चार घंटे रोज बच्चों को पढाया---

    खेल नियमित शाम को संगमें खिलाया, बागवानी का नया जो शौक आया

    एक घंटे पौध में, पानी पटाया, तुम पटी फिर भी नहीं, तो-- की करिए ?

    कैंचियों का है ज़माना खुब कतरिये, व्यर्थ ताने मारना बस बन्द करिए


    प्रभुने किये उपकार हमपर यूँ बड़े, हैं आज बच्चे पैर पर अपने खड़े --

    लक्ष्य भेदा, बन चुके वे लाडले, मौजूदगी मेरी इधर, घर में खले

    पककर कढ़ाई से गिरे, चूल्हे पड़े, खुब भुन चुके हो तेल में अब, जल मरिए

    ढल चुकी है शाम, 'रविकर' चल-चलिए,व्यर्थ ताने मारना बस बन्द करिए-

    उत्तर देंहटाएं