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शनिवार, 25 जून 2011

वो मंदिर भी जाता,मस्जिद भी जाता

वो मंदिर भी जाता
मस्जिद भी जाता
ईद दीपावली
बैसाखी  मनाता
रमजान में रोजे
पर्यूषण में उपवास रखता
क्रिसमस पर चर्च में
क्राइस्ट को याद करता
गुरुद्वारे में मत्था टेकता
निरंतर खुदा की
इबादत में डूबा रहता
कोई सिरफिरा
कोई पागल कहता
उसकी नज़रों में
खुदा हर रूप में
एक था
सर्वधर्म सम भाव
उसका सोच था
बेफिक्र जीता था
© डा.राजेंद्र तेला,निरंतर
25-06-2011
1097-124-06-11

5 टिप्‍पणियां:

  1. वो एक इंसान था सही नहीं है.
    आपको लिखना चाहिए कि वही एक इंसान था.

    सुंदर रचना.

    उत्तर देंहटाएं
  2. एक सच्चे इंसान की बात - सुन्दर - ये "पर्यूषण" का मतलब?

    सादर
    श्यामल सुमन
    09955373288
    www.manoramsuman.blogspot.com
    http://meraayeena.blogspot.com/
    http://maithilbhooshan.blogspot.com/

    उत्तर देंहटाएं
  3. तीसरी आंख ने कहा…

    अति सुंदर, उसने तो आदमी ऐसा ही पैदा किया था
    २६ जून २०११ ५:४३ अपराह्न

    उत्तर देंहटाएं
  4. गंगाधर ने कहा…

    अति सुंदर
    २७ जून २०११ ११:१७ अपराह्न

    उत्तर देंहटाएं
  5. जाट देवता (संदीप पवाँर)28 जून 2011 को 12:03 am

    जाट देवता (संदीप पवाँर) ने कहा…

    कौन था उसके बारे में भी कुछ
    २५ जून २०११ ९:३४ अपराह्न

    उत्तर देंहटाएं