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मंगलवार, 14 जून 2011

दिल अब सूखा हुआ दरिया हो गया

दिल अब सूखा हुआ
दरिया हो गया
कभी मोहब्बत के
पानी से लबालब था
मस्ती में बहता था
उसकी रुसवायी ने
सब बदल दिया
ग़मों की गर्मी ने
दरिया
को सुखा दिया
अश्क भी सूख गए
चेहरे से हंसी के
निशाँ तक मिट गए
निरंतर महकने वाले
फूल सूख गए
दिल का गुलशन अब
खिजा में बदल गया
जो कभी दिल था
अब यादों का
कब्रिस्तान हो गया
14-06-2011
      1044-71-06-11   

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