ADVERTISEMENT

Bookmark and Share

Register To Recieve Latest Poems On Your Email or Mobile

Enter your email address:

Click Here To Subscribe On Mobile Bookmark and Share

गुरुवार, 16 जून 2011

गुजरे वक़्त की याद , ताज़ा हवा सी लगती

गुजरे वक़्त की याद
ताज़ा हवा सी लगती 
दिल को ठंडक देती  
आँखों को नम करती
जहन में जल जला
पैदा करती  
निरंतर कल आज में 
बदलता रहता है 
सूखे मौसम में भी
हरयाली लाता है 
कल,
आज भी कल हो जाएगा 
जो आज हो रहा है 
कल भी वही होगा 
एक बार फिर रोना होगा
आज को याद कर
कल फिर हँसना होगा
डा.राजेंद्र तेला,निरंतर
16-06-2011
1056-83-06-11
जीवन,समय,कल,आज ,कल 

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें