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बुधवार, 1 जून 2011

भैया पहले क्यों नहीं बोले

बहुत शिद्दत से
उन्हें आदाब किया
उन्होंने मुंह फिरा लिया
 अरमानों को
परवान चढ़ने से
पहले ही कुचल दिया
हम 
भी एक नंबर के 
ढीठ ठहरे 
निरंतर मुस्कराकर
 आदाब करते रहे
वो भी कम नहीं
मुंह फिराते रहे
आखिर थक कर वो
बोले इक दिन
क्या चाहते हो
मैंने कहाँ
बहन जैसी
लगती हो
मुझे बहुत भाती हो
राखी बाँध दो
मुस्करा कर जवाब
उन्होंने दिया
भैया पहले क्यों नहीं
बोले
नींद चैन खराब किया
नाहक हमको सताया
हम तो खुद भी राखी
लिए घूम रहे थे
डा.राजेंद्र तेला,निरंतर
01-06-2011
975-02-05-11

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