ADVERTISEMENT

Bookmark and Share

Register To Recieve Latest Poems On Your Email or Mobile

Enter your email address:

Click Here To Subscribe On Mobile Bookmark and Share

शनिवार, 21 मई 2011

गलतफहमी


हमें जाना नहीं
पहचाना नहीं
फिर भी तोहमत
से नवाज़ा हमको
बेवफ़ाई का दाग
लगाया हम पर
हमने निरंतर बहन
समझा
तुमने आशिक समझ
ठुकराया हमको
अपनी गलतफहमी
की सज़ा दी दे दी
हमको
21-05-2011
E

1 टिप्पणी:

  1. हमें जाना नहीं
    पहचाना नहीं
    फिर भी तोहमत
    से नवाज़ा हमको
    बेवफ़ाई का दाग
    लगाया हम पर

    कम शब्दों में छूती बात बधाई

    उत्तर देंहटाएं