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बुधवार, 4 मई 2011

पगडंडियाँ


कभी
ऊपर,कभी नीचे
कभी दायें,कभी बायें
कटीली झाड़ियों और
पत्थरों के बीच
जीवन का अनुभव
कराती हैं 
चलती हैं पगडंडियाँ
कहीं गहरी खाई
मौत का डर बताती
हवा में झूमते
देवदार के लम्बे पेड़
चहचहाते पक्षी
निरंतर
खुशी से जीने का
सन्देश  देते
बिना थके चलने की
शक्ति देते
 पहाड़ों से अठखेलियाँ
 करते बादल
बिना हार माने
आगे बढ़ने की 
प्रेरणा देते
मन करता बिना
हार माने
जीवन की पगडंडी पर
चलता रहूँ
हिम्मत से अपनी
मंजिल पर पहुँच
जाऊं 
04-05-2011
808-15-05-11
E

7 टिप्‍पणियां:

  1. नेहा भाटिया5 मई 2011 को 6:02 pm

    नेहा भाटिया ने कहा…

    बहुत ही खूबसूरत रचना। दिल को छू गयी
    ५ मई २०११ ४:१४ अपराह्न

    उत्तर देंहटाएं
  2. mangal yadav ने कहा…

    अठखेलियाँ करते
    बिना हार माने
    आगे बढ़ने की प्रेरणा
    देते
    बहुत ही खूबसूरत रचना। दिल को छू गयी
    ५ मई २०११ २:४५ अपराह्न

    उत्तर देंहटाएं
  3. Anita ने कहा…

    प्रकृति का सुंदर वर्णन !
    ५ मई २०११ १:०४ अपराह्न

    उत्तर देंहटाएं
  4. DR. ANWER JAMAL ने कहा…

    Nice post.

    प्यारे भाईयो ! आप ज्ञान की तलाश में हैं, एक दिन मंज़िल पर भी पहुंचेगे।
    आपका स्वागत है हमारे दिल की दुनिया में हर दरवाज़े से।

    उत्तर देंहटाएं
  5. गंगाधर ने कहा…

    bhut khubsurat rachna...
    ५ मई २०११ ७:३५ पूर्वाह्न

    उत्तर देंहटाएं
  6. sushma 'आहुति'5 मई 2011 को 6:05 pm

    sushma 'आहुति' ने कहा…

    bhut khubsurat rachna...
    ५ मई २०११ ७:३२ पूर्वाह्न

    उत्तर देंहटाएं
  7. Vaanbhatt ने कहा…

    जीवन चलने का नाम...चलते रहो सुबहोशाम...की रास्ता कट जायेगा मितरा...रास्ता काटना है...मजिल तो तय है कि मिल ही जाएगी...
    ५ मई २०११ ७:४८ अपराह्न

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