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सोमवार, 30 मई 2011

आशा,निराशा का साथ कभी ना मिटता

नया साल आता
निरंतर
नयी आशाएं जगाता
पुराना इतहास के
गर्भ में समा जाता
नए का इंतज़ार
होता रहता
सूखे के बाद
बरसात का आना
नए साल सा लगता
सूखे का डर फिर भी
मन में रहता   
अगले बरस फिर
बरसात का इंतज़ार
होता रहता
आशा,निराशा का
साथ कभी ना मिटता
निराशा के बिना आशा
कौन करता ?
जीवन बड़ा बोझिल
होता  
30-05-2011
962-169-05-11

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