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रविवार, 8 मई 2011

कभी सिर्फ मैं ही होता था दिल में उनके


कभी सिर्फ मैं ही
होता था दिल में उनके
अब सारा ज़माना 
उनके पास 
जगह नहीं मेरे लिए
गिला इस का नहीं कि
हूँ ,दूर उनसे
रंज इस का कि मिलते तो
पहचानते भी नहीं  मुझे
ना जाने क्यूं भूलते
अर्श पर सब सलाम करते
फर्श पर लोग
निरंतर यूँ ही दुत्कारते
आगाह कर रहा हूँ उनको
वक़्त हमेशा इकसार 
ना रहता
इंसान कभी
अर्श कभी फर्श पर होता
नहीं चाहता कभी
सुलूक ऐसा हो साथ उनके
जैसा किया उन्होंने साथ मेरे
08-05-2011
825-32-05-11
(अर्श = आसमान,फर्श = ज़मीन)

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