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शुक्रवार, 20 मई 2011

खरीददार


शादी की
पहली रात को भी
वो नशे में चूर
देर से घर आया
  आते ही पत्नी का 
 घूंघट उठाया
गले से लगाया
हवस को मिटाया
सौ रूपये का नोट दिया
और सो गया
पत्नी की आँखों के आगे
अन्धेरा छा गया
निरंतर,देखा सपना
टूट गया
उसे घर की जगह
बाजार
पती की जगह
खरीददार  मिल गया
इंसान की जगह
दरिन्दे से पाला
पड़ गया 
© डा.राजेंद्र तेला,निरंतर 
इंसान,दरिंदा,खरीददार,हवस
20-05-2011
895-102-05-11 

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