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मंगलवार, 17 मई 2011

बहुत जी लिए अब जाने की बारी है

फूल बहुत
खिल चुके जीवन में 
अब झड़ने की बारी है
कई रंग भरे
कई चित्र बनाए
जीवन के कैनवास पर
अब उन्हें
मिटाने की बारी है
बहुत हंस लिए
बहुत रो लिए
बहुत बहक लिए
बहुत चहक लिए 
अब खामोश
होने की बारी है
निरंतर
दूर रहे खुदा से
अब उससे
मिलने की बारी है  
बहुत जी लिए अब
जाने की बारी है 
डा.राजेंद्र तेला,निरंतर
17-05-2011
876-83-05-11

2 टिप्‍पणियां:

  1. ek din to jana hi hai, per jab tak saansen hain ... na sochen to achha hai

    उत्तर देंहटाएं
  2. जाना तो है ही ..पर उसकी क्या तैयारी करनी ? सुन्दर अभिव्यक्ति

    उत्तर देंहटाएं