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रविवार, 8 मई 2011

दिल को ठंडक पहुँचाओ

ख़्वाबों में आते हो
ख्यालों में रहते  हो
दिल क्यूं ना लगाते हो ?
दर्द बन कर ही
दिल में आ जाओ
राहत हमें पहुचाओं
पास हमारे हो
इतना सुकून तो दिलाओ
निरंतर
हसरत रखी तुम्हारी
अब तो
परवान उसे चढाओ
मरने से पहले तो 
दिल को ठंडक 
   पहुँचाओ    
08-05-2011
822-29-05-11

1 टिप्पणी:

  1. जो हो ख्वाबों और ख़यालों में वो तो रहता ही है दिल में !मन की बात कहती बहुत अच्छी रचना । बधाई एवं शुभकामनाएँ !

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