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शनिवार, 21 मई 2011

फिर चोट ना खाएँगे

चाहता  नहीं  वो 
लौट कर आएँ फिर से
आएँ भी तो मिले ना
हमसे
अब तन्हाई से
दोस्ती कर ली हमने
बहुत मुश्किल से
दिल को सम्हाला हमने
निरंतर बेवफाई देखी
 हमने
ज़ख्मों को हरा ना
होने देंगे
अकेले में रो लेंगे
फिर चोट ना खाएँगे
बिना अपनों के
जी लेंगे
21-05-2011
906-113-05-11

4 टिप्‍पणियां:

  1. शालिनी कौशिक22 मई 2011 को 6:48 pm

    शालिनी कौशिक ने कहा…

    sundar prastuti.
    २२ मई २०११ ६:२५ पूर्वाह्न

    उत्तर देंहटाएं
  2. Vaanbhatt ने कहा…

    ऐसी भी क्या बात है तेला जी...दिल मिले ना मिले हाथ मिलाते रहिये...
    २२ मई २०११ १०:३८ पूर्वाह्न
    kase kahun? ने कहा…

    उत्तर देंहटाएं
  3. kase kahun? ने कहा…22 मई 2011 को 6:51 pm

    sakaratmak prastuti....
    २२ मई २०११ ३:१९ अपराह्न

    उत्तर देंहटाएं
  4. sushma 'आहुति'23 मई 2011 को 1:31 pm

    sushma 'आहुति' ने कहा…

    bhut hi sunder shabd rachna...

    २३ मई २०११ ७:३५ पूर्वाह्न

    उत्तर देंहटाएं