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शुक्रवार, 13 मई 2011

धर्म का अर्थ पता चल गया

भूखा था
किसी ने खाने को
दो रोटी दी 
भूख मिटायी
प्यासा था
किसी ने पानी पिलाया
प्यास बुझायी
दर्द से पीड़ित था
आँख से आंसूं निकल
रहे थे
किसी ने कंधे पर
हाथ रख कर सांत्वना दी
दर्द कम हुआ
बीमार था
किसी ने चिकित्सा कर
जान बचायी
आँखों से दिखता ना था
किसी ने हाथ पकड़
सड़क पार करायी
निरंतर सोचता था
धर्म क्या होता है ?
आज सोचा तो धर्म का 
अर्थ पता चल गया
डा.राजेंद्र तेला,निरंतर, 
13-05-2011
848-55-05-11

3 टिप्‍पणियां:

  1. mahendra srivastava ने कहा…

    कुछ रचनाएं ऐसी होती हैं जिससे आदमी को सबक लेना चाहिए, ये उनमें से ही एक है। बढिया
    १४ मई २०११ ६:३० अपराह्न

    उत्तर देंहटाएं
  2. Vaanbhatt ने कहा…

    darm ke alava jo kuchh bhi hai...vo adharm hai...koi shaq...

    १५ मई २०११ १२:५१ पूर्वाह्न

    उत्तर देंहटाएं
  3. Dr. shyam gupta said...

    ---सही पता चला----जो जिसका मूल गुण भाव है वही उसका गुणधर्म है...धर्म है ...और मानव का मूल गुणधर्म है ईश्वरीय-गुणों को अपनाना/ व्यवहार में लाना ....
    ...सभी को पता चल जाता, तो दुनिया में क्या न होजाता ॥
    May 14, 2011 12:37 AM

    उत्तर देंहटाएं