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मंगलवार, 24 मई 2011

जब चाहो आ जाओ तुम


यूँ कयामत 
ना बरपाओ तुम 
इंतज़ार में 
ना रुलाओं तुम
अब और सज़ा 
ना दो मुझको 
अब सूरत 
दिखाओ तुम
दिल का 
दरवाज़ा खुला है 
जब चाहो 
आ जाओ तुम
डा.राजेंद्र तेला,निरंतर 
24-05-2011
922-229-05-11
शायरी,

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