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शुक्रवार, 13 मई 2011

आवेश में आने का अर्थ अब समझ आ गया

गुरू 
आवेश में आने का
अर्थ समझा रहा था
शिष्य निरंतर
समझ नहीं आया 
दोहरा रहा था 
धैर्य रखो
समझ में आ जाएगा
गुरु भी हर बार यही
कह रहा था
माथा पच्ची के
बाद भी
जब शिष्य को समझ
नहीं आया
गुरु ने धैर्य खोया 
जोर से चिल्लाया
झन्नाटे दार थप्पड़
शिष्य के 
कान पर लगाया
शिष्य रोते रोते
कहने लगा
धैर्य खोने का
आवेश में आने का
अर्थ अब समझ
आ गया
डा.राजेंद्र तेला,निरंतर
13-05-2011
849-56-05-11
आवेश ,धैर्य,जीवन दर्शन,जीवन गुरु,शिष्य

   

1 टिप्पणी:

  1. सीधी उंगली घी न निकले तो उंगलियों को जोड़ कर चांटा बनाना पड़ता है...

    जय हिंद...

    उत्तर देंहटाएं