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बुधवार, 18 मई 2011

उसे तो बहना है,निरंतर बहती रहती

नदी निरंतर बहती
रहती
बरसात में ज्यादा
उफनती
कहीं खुशहाली तो कहीं
बाढ़ के रूप में दुःख के
पहाड़ लाती
किसी को खुश करती
किसी की जान लेती
कई लाशें उसमें बहती
कई जिंदगियां उसमें
नाहती
मौसम कोई भी हो
उसे कोई फर्क नहीं
पड़ता
उसे तो बहना है
निरंतर बहती रहती
ज़िन्दगी सी चलती
रहती
18-05-2011
884-91-05-11

1 टिप्पणी:

  1. बहुत सुन्दर लिखा है आपने.....सही कहा चलती का नाम जिंदगी

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