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रविवार, 15 मई 2011

आँख खुलने पर

आँख खुलने पर
बगल में कोई नहीं
होता
ना कोई बालों में
ऊँगलियाँ फिराता
ना मुस्कारात़ा चेहरा
नज़र आता
सुबह का रंग अब
फीका लगता
नींद से उठना भी
अच्छा नहीं लगता
निरंतर ख़्वाबों में
मिलता रहूँ
बस ये ही तमन्ना
रखता
15-05-2011
861-68-05-11

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