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बुधवार, 18 मई 2011

अप्रैल फूल पर कविता-अप्रैल फूल

उनके आने का 
पता चला
दिल उमंग से 
भर गया
निरंतर दिल में 
पल रहा
सन्नाटा ख़त्म हुआ
लम्हा,लम्हा इंतज़ार
करता रहा
कभी दरवाज़े पर
खडा होता
कभी खिड़की से देखता
तमाम रात बैठा रहा
उनका आना ना हुआ
मन मायूस हो गया
दिल आशंकाओं से
भर गया
बहुत दिन बाद
मालूम हुआ
ना वो आये
ना उन्होंने आने का
पैगाम भिजवाया
पहली अप्रैल को
किसी ने
अप्रैल फूल बनाया
18-05-2011
886-93-05-11

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