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शुक्रवार, 13 मई 2011

लिखी थी चैन,सुख की कुछ ही पंक्तियाँ,मेरे हाथों की लकीरों में

जब लिखी थी
सुख चैन की
कुछ ही पंक्तियाँ
हाथों की लकीरों में
क्यूं फिर
उसे पाने के लिए
लड़ता रहा ?
किस्मत को
निरंतर उलटने की
कोशिश करता रहा
क्यूं ना हालात को
खुले दिल से
स्वीकार करूँ
कर्म करता रहूँ
प्रभु में ध्यान
लगाता रहूँ
हंसने की कोशिश
करता रहूँ
धैर्य से जीता रहूँ 
डा.राजेंद्र तेला,निरंतर 
11-05-2011
840-47-05-11
 जीवन, जीवन  शैली,चैन,सुख,इश्वर,पूजा पाठ ,कर्म

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