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बुधवार, 11 मई 2011

मौत के क्रंदन के बाद,हंसने का अवसर मिला



गरज
गरज कर बरसे बादल
वृक्षों को नहलाया जम कर
प्यासी धरती की प्यास
बुझाई
बालक, बूढ़े वर्षा में नहाए
किसानों के चेहरे मुस्काये
खेतों में बीज रोपेंगे
नयी फसल लगायेंगे
भूखे पेट आशा से भर गए
नदी,तालाब जीवित हो गए
उदास चेहरे
खुशी से मतवाले हो गए
हवा के ठन्डे झोंके चल गए
मोर नृत्य में मस्त हो गए
पक्षी कलरव करने लगे
पानी की बूंदों ने धूप को चीरा
इन्द्रधनुष ने मुंह दिखलाया
मानों
मरघट फूलों से महक गया
मौत के क्रंदन के बाद
हंसने का अवसर मिला

11-05-2011
835-42-05-11     

2 टिप्‍पणियां:

  1. वर्षा रितु है ही ऐसी जो मुर्दों मैं भी जान देती है

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  2. prakriti ka manoram chitra prastuti kiya hai aape.... abhar

    उत्तर देंहटाएं