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शनिवार, 7 मई 2011

क्यों ना मैं ही पहल करूँ ?



कब तक हर तरफ फ़ैली
गंदगी देखूं ?
कब तक  भ्रष्टाचार के 
किस्से  सुनूं ?
कब तक मार काट की 
खबरें पढूं ?
क्यों किसी और का 
इंतज़ार करूँ ?
कोई और कर लेगा 
यह सोच कर बैठा रहूँ ?
सब की तरह चुपचाप
देखता रहूँ
क्यों ना मैं ही पहल
करूँ ?
कुछ गंदगी मैं भी साफ़
करूँ
भ्रष्टाचार से लड़ाई लडूँ
निरंतर
सोते हुओं को जगाऊँ
बढ़ रही नफरत को
कम करूँ
06-05-2011
818-25-05-11

E

3 टिप्‍पणियां:

  1. sushma 'आहुति'8 मई 2011 को 12:35 am

    sushma 'आहुति' ने कहा…

    bhut acchi pahal hai...
    ७ मई २०११ ७:१७ अपराह्न

    उत्तर देंहटाएं
  2. रमेश कुमार जैन उर्फ़ "सिरफिरा"8 मई 2011 को 12:36 am

    रमेश कुमार जैन उर्फ़ "सिरफिरा" ने कहा…

    बहुत अच्छा लिखा है.
    क्या आप हिंदी से प्रेम करते हैं? तब एक बार जरुर आये. मैंने अपने अनुभवों के आधार आज सभी हिंदी ब्लॉगर भाई यह शपथ लें हिंदी लिपि पर एक पोस्ट लिखी है.मुझे उम्मीद आप अपने सभी दोस्तों के साथ मेरे ब्लॉग एक बार जरुर आयेंगे. ऐसा मेरा विश्वास है.
    ७ मई २०११ ५:२३ अपराह्न

    उत्तर देंहटाएं
  3. Vaanbhatt ने कहा…

    बिलकुल सही बात शुरुआत तो हमें ही करनी होगी...पर सिस्टम के अन्दर और सिस्टम के बाहर से लड़ने में अंतर है...हम जीतना कर सकते हैं उतना जरुर करें...शरीफ लोग लाचारी का ताना-बाना कब तक ढ़ोयेंगे...
    ७ मई २०११ ८:१९ पूर्वाह्न

    उत्तर देंहटाएं