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शुक्रवार, 6 मई 2011

हास्य कविता -पानी होठों से लगने से पहले ही गिलास छलकता

बाल बिखरे हुए
आँखों में आंसू लिए
हंसमुख जी उदास बैठे थे
मैंने उदासी का कारण पूछा
तो बोले
कल शाम उनका पैगाम
आया था
मिलना चाहते हैं
बताया था
नये कपडे खरीदे,
बन ठन कर तैयार हुआ,
कपड़ों पर ईत्र लगाया ,
फूलों का गुलदस्ता लाया
उन्हें भेट देने को
तोहफा लाया
वो आये भी ,
दिल खोल कर मिले भी
मगर जाते जाते
अपनी शादी का न्योता
दे गए
मुझे धोखा दे गए
किसी और के हो गए
निरंतर
मेरे साथ ऐसा ही होता
पानी होठों से लगने से
पहले ही गिलास
छलकता
06-05-2011
815-22-05-11

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