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गुरुवार, 28 अप्रैल 2011

मैंने एक करिश्मा देखा

मैंने एक करिश्मा देखा
धर्म को बाज़ार होते देखा 
जो इंसान बने नहीं
उनको खुदा बनते देखा
नाम के आगे  पूज्य श्री,
बाबा भगवान लगाते देखा 
जिन्होंने कभी 
इंसानियत दिखाई नहीं
उन्हें खुद को पुजवाते देखा
ऊंचे आसन पर बैठे देखा
बड़ी गाडी में जाते देखा
हवाई जहाज में उड़ते देखा
खूबसूरत लिबास में देखा
सर पर मुकुट गले में
रत्नजडित माला पहने देखा  
महल से बड़े 
आश्रम में रहते देखा
बहुमूल्य चढ़ावा इकट्ठा
करते देखा
लोगों की भावनाओं से
खेलते देखा
लोगों को मूर्ख बनाते देखा
मैंने एक करिश्मा देखा 
डा.राजेंद्र तेला,निरंतर 
28-04-2011
773-193-04-11

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