ADVERTISEMENT

Bookmark and Share

Register To Recieve Latest Poems On Your Email or Mobile

Enter your email address:

Click Here To Subscribe On Mobile Bookmark and Share

रविवार, 3 अप्रैल 2011

अब गमों से दोस्ती कर ली

अब गमों से 
दोस्ती कर ली
उनकी बेवफाई को 
हाँ कह दी
जब उन्हें मोहब्बत का 
मतलब ही पता नहीं
दिल में मलाल नहीं
क्या गिला शिकवा रखूँ 
मोहब्बत को 
उन्होंने खेल समझा
दिलों से खेलना शौक उनका
अफ़सोस उन्हें 
खेल का सिला पता नहीं
जानते नहीं 
जो खंजर के सहारे जीते हैं
खंजर से ही मारे जाते हैं 
खुदा उन्हें माफ़ करे 
उनसे मुकाबला नहीं करेंगे 
हमें मोहब्बत से जीना है 
हम मोहब्बत जीते रहेंगे
उनसे मोहब्बत करते रहेंगे
कॉपीराइट@
डा.राजेंद्र तेला,निरंतर
03-04--11
588—21 -04-11

1 टिप्पणी: