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रविवार, 10 अप्रैल 2011

तुम्हें पा ना सका

तुम्हें पा ना सका
लोगों को बहाना मिला
दीवाना मुझे कहते हैं
इश्क में 
नाकाम बताते हैं
उन्हें कहाँ पता
तुम्हारा सौदा हुआ
मुफलिसी ने मजबूर
तुम्हारे अब्बा को किया
उनकी
खुशी के खातिर तुम ने
सौदा मंज़ूर किया
अपनी
चाहत को कुर्बान किया
तुम्हारी खुशी को
हमने भी कबूल किया
मोहब्बत के खातिर
सब कुछ लुटा दिया
10-04-2011
648-81-04-11

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