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शुक्रवार, 22 अप्रैल 2011

उसकी महक पीछा ना छोडती

उसकी
महक पीछा ना
छोडती
सुबह-ओ-शाम मेरे
जहन में बसती
वो जग रही होगी
ख्याल से रातों को
नींद उडती
आइना देखता सूरत
उसकी दिखती
जज्ब मुझ में हो गयी
सूरत उसकी
वो नहीं रही 
रूह उसकी भटकती
निरंतर मेरे इर्द गिर्द
घूमती 
22-04-2011
736-156-04-11

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