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बुधवार, 6 अप्रैल 2011

शुक्र है,तुमने नाम से तो पहचाना मुझे


शुक्र है
तुमने नाम से तो
पहचाना हमको 
हम तो सोचते थे
तुम नाम लेने वाले से भी
रिश्ता ना रखोगे 
दिखाने के लिए ही सही
लबों से नाम तो लिया
नफरत का इजहार 
ना किया
हमने इस बात पर ही
तुमको माफ़ कर दिया 
गिला,शिकवा दिल से
दूर कर दिया
अब शहर में उनको ढूँढेंगे
जो हमारा नाम 
तुम्हारे सामने लेते हैं 
उनसे तुम्हारा हाल 
जान लेंगे 
दिल को सुकून दे देंगे 
कॉपीराइट@

डा.राजेंद्र तेला,निरंतर
06-04-2011
618-51 -04-11

1 टिप्पणी:

  1. बहुत बढ़िया,

    आप बहुत अच्छा लिखते हैं, मैं इससे अच्छा कमेन्ट किसी कविता पर नहीं कर सकता, क्यूंकि मुझे नहीं पता कि कविता पर क्या कमेन्ट करना चाहिए

    मुझे खुशी है कि अब आप सिर्फ अपने ब्लॉग पर ही कविता लिखते हैं, उसको अन्य ब्लोगों पर नहीं लिखते

    क्यूंकि आप सभी कवितायेँ ही लिखते हैं तो अपने ब्लोगों में अन्य टैग के साथ "कविता" टैग का प्रयोग भी किया करें

    उससे आपकी सभी कवितायेँ, अपना ब्लॉग -> जीवन शैली -> कविता में दिखाई दिया करेंगी

    एक गुजारिश है, आपके पास बहुत अच्छी कवितायेँ हैं, एक कविता संकलन तैयार करके उसको पुस्तक के रूप में प्रकाशित करवा लीजिए, उससे आपको भी फायदा होगा |

    आप लिखते तो अच्छा हैं पर कुछ तकनीकी जानकारियों से आप अनभिज्ञ हैं, मेरे ब्लॉग पर मैं समय-समय पर तकनीकी जानकारी देता रहता हूँ, आप देखें और पालन करें तो आपको फायदा होगा - धन्यवाद

    उत्तर देंहटाएं