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शुक्रवार, 22 अप्रैल 2011

कुछ लोग हर धर्म में गंदे होते


हर धर्म के उसूल
अच्छे होते हैं 
पर हर धर्म में 
कुछ लोग गंदे होते हैं 
धर्म के नाम पर
धंधे करते हैं  
आस्था की आड़ में 
स्वार्थ साधते हैं 
लोगों को बरगलाते हैं 
धर्म के नाम पर
डराते हैं 
राजनीती करते हैं  
ऐसे लोगों को पहचानों
इन से खुद भी बचो 
औरों को भी बचाओ 
डा.राजेंद्र तेला,निरंतर
धर्म,राजनीती,आस्था,
22-04-2011
731-153-04-11

7 टिप्‍पणियां:

  1. शानदार लिखा है आपने. बधाई स्वीकार करें

    मेरे ब्लॉग पर आयें और अपनी कीमती राय देकर उत्साह बढ़ाएं
    समझो : अल्लाह वालो, राम वालो

    उत्तर देंहटाएं
  2. Sawai Singh Rajpurohit said...

    सुन्दर कविता, मन को भा गई

    उत्तर देंहटाएं
  3. DR. ANWER JAMAL said...

    जो गंदे होते हैं उनमें धर्म कम होता है या फिर सिरे से होता ही नहीं है ।
    April 22, 2011 5:24 AM

    उत्तर देंहटाएं
  4. akhtar khan akela said...

    raajendar bhaai aapne to bas mushayra hi lut liyaa bdhaai ho . akhtark khan akela kota rajsthan
    April 22, 2011 2:49 AM

    उत्तर देंहटाएं
  5. pyare mohan tripathi
    to me


    show details 9:51 PM (11 hours ago)

    Thanx sir for sending this lovely poem.
    with regards
    P.M. Tripathi

    उत्तर देंहटाएं