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बुधवार, 20 अप्रैल 2011

बात की बात

बात की
बात बड़ी निराली
जब तक छुपी रहती

कोई बात नहीं होती

जुबान से निकलती
तो बतंगड़ बनती
बात से
नयी बात निकलती
बात हक की,
युद्ध कराती
आजादी की बात,
क्रांती कराती
बात का
कोई घर नहीं होता
एक बार निकली
शहर,शहर
बसेरा बनाती
लोगों के राज़
लोगों को बताती
मन को लुभाती
दिलों को मिलाती
कडवी हो तो, 
दुश्मनी कराती
निरंतर
गुल खिलाती बात
दिल में
दुःख लाती बात
चेहरे पर
हंसी लाती बात
बात की
बात भी,कमाल की बात
बात ही
बात में,लिख दी आज
बात की बात
20-04-2011
714-137-04-11

2 टिप्‍पणियां:

  1. बात ही
    बात में,लिख दी आज
    बात की बात
    आखिर आपने लिख ही दी बात ही बात में ....

    उत्तर देंहटाएं